किसी दिन लिख सका
तो जरूर लिखूँगा
जाते दिसंबर की बात
ये साल का आखिरी पखवाड़ा
मुझसे ले जाएगा
दुबारा फिर न लौट आने का वादा
लोग जश्न में डूबे होंगे
मैं मातम में रहूँगा
जनवरी के इंतजार में
दिसंबर मुझसे भुलाया न जा सकेगा
मैं रहूँगा तेरे जाने की उदासी में
और सोचूँगा जरूर
कि क्या साल के आखिरी दिन
सच में आखिरी थे!!

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