सोमवार, 12 जनवरी 2026

जी भर बतियाने के बाद- के० पी० अनमोल

 


के० पी० अनमोल नई पीढ़ी के एक ऐसे प्रतिभावान और विलक्षण ग़ज़लकार हैं, जिनकी ग़ज़लों में प्रेम है, परिवार है, समाज है, प्रकृति है, जीवन दर्शन है और आध्यात्म भी है। इनकी ग़ज़लों में सरलता है और अपने सीधे-सादे कहन के कारण बड़ी बात कहने का माद्दा भी है। अपनी इन्हीं ख़ूबियों के कारण बहुत कम समय में ही इन्होंने हिन्दी ग़ज़ल के क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण मक़ाम हासिल किया है।
(संग्रह की भूमिका से)

डॉ० राकेश जोशी
वरिष्ठ हिन्दी ग़ज़लकार

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शिल्प की दृष्टि से के० पी० अनमोल की ग़ज़लें सुगठित, सुघड़ और उरूज पर खरी उतरती हैं। विशेष बात यह है कि उन्होंने अपनी ग़ज़लों में ग़ज़लियत को बरक़रार रखने का ज़रूरी कार्य किया है। चूँकि ग़ज़ल के उरूज और परम्परागत उर्दू शायरी के स्वभाव से अनमोल वाक़िफ़ हैं और ग़ज़ल में उनका कुछ नया करने का आग्रह है इसीलिए उनमें प्रयोगशीलता का जोखिम उठाने का साहस भी ख़ूब है। नए काफ़िये और अनूठे रदीफ़ के प्रयोग उनकी शैल्पिक सिद्धहस्तता को बख़ूबी उद्घाटित भी करते रहते हैं।
('हिन्दी ग़ज़लकार : एक अध्ययन' से)

हरेराम समीप
वरिष्ठ हिन्दी ग़ज़लकार एवं आलोचक

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ग़ज़ल को अपने खून-पसीने से सींचने वालों में एक युवा नाम के० पी० अनमोल का भी है। के० पी० अनमोल अपनी मेहनत के बल पर हिन्दी ग़ज़ल के जाने-पहचाने व ज़रूरी नाम बन गये हैं। कोई भी रचनाकार अगर कम उम्र में बड़ी सफलता हासिल करता है तो कहीं न कहीं उसमें कुछ विशेष गुण ज़रूर होता है और उसकी यही विशेषता उसे वैशिष्ट्य की श्रेणी में लाकर खड़ा करती है।

डॉ० भावना
हिन्दी ग़ज़लकार एवं आलोचक
संपादक, आँच वेब पत्रिका



पुस्तक- जी भर बतियाने के बाद
विधा- ग़ज़ल (हिन्दी)
प्रकाशक- श्वेतवर्णा प्रकाशन, नई दिल्ली
संस्करण- प्रथम, 2022

प्रकाशक की वेबसाइट से मँगवाया जा सकता है
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